प्रधानमंत्री क्यों नहीं बन पाई Sonia Gandhi, जाने खास तथ्य

Sonia Gandhi: कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) को हर कोई जानता होगा। लेकिन उन से जुड़े कुछ पहलुओं को कम ही लोग जान पाए होंगे। आखिर ऐसी क्या वजह रही होगी की सोनिया गांधी प्रधानमंत्री क्यों नहीं बन पाए। आइए जानते हैं उनसे जुड़े कुछ वह तथ्य 

सोनिया गांधी का परिचय

9 दिसंबर 1946 को इटली (Italy) में लूसियाना वेनाडो सोनिया गांधी का जन्म हुआ था। सोनिया गांधी का पहले का नाम एंटोनिया ऐडविज अल्बीना मौनो (Antoniyo Adviz Albino Maino) था। यह नाम उनको भारत में राजीव गांधी से शादी करने के बाद रखा। सोनिया गांधी बेल एजुकेशन ट्रस्ट की अल्मा मेटर रह चुकी हैं।

सोनिया गांधी का सफर कैसा रहा

सोनिया गांधी ने भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) के पुत्र राजीव गांधी के साथ शादी की। उनसे शादी करने के कुछ टाइम बाद उनको एक पुत्र राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और पुत्री प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) हुई। वैसे आपको बता दें पहले सोनिया गांधी राजनीति में आने से पहले मना कर रही थी। लेकिन बाद में कांग्रेस पार्टी (Congress Party) के कहने के बाद ही उन्होंने राजनीति में आने का निर्णय लिया।

1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सोने गांधी ने अपने पति राजीव गांधी के लिए वोट मांगे थे।

1991 में जब लिठे के उग्रवादियों ने राजीव गांधी की हत्या कर दी थी। उसके बाद पार्टी ने उनको राजनीति में आने के लिए आग्रह किया। लेकिन तब पर भी सोनिया गांधी ने आने से इनकार किया था।

लगातार बदलते हालात के कारण हुए वर्ष सोने गांधी ने 1997 में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की। और बाद में 1998 में सोनिया गांधी को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया था। लेकिन पार्टी के कुछ नेताओं को सोने गांधी के अध्यक्ष बनने पर आपत्ति थी। जिसमें शरद पवार और तीन नेताओं ने उनके विरुद्ध 1999 में एक विद्रोह कर दिया था। इसके बाद सोनिया गांधी ने पार्टी को अपने अध्यक्ष सत्यापन पत्र देकर पेपर देने की पेशकश की लेकिन पार्टी हाईकमान ने इसको मना कर दिया था।

1999 में जब भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेई देश के प्रधानमंत्री बने। तब सोनिया गांधी को अपोजिशन पार्टी का लीडर चुना गया।

5 साल बाद फिर 2004 में कांग्रेस पार्टी ने सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) की अध्यक्षता में लोकसभा का चुनाव लड़ा। जिसकी बदौलत उन्होंने 15 पार्टियों को एकत्र किया और जीत हासिल की 2004 में सोनिया गांधी को पार्टी दल का नेता चुना गया।

लेकिन विपक्षी कुछ नेताओं ने सोनिया गांधी को विदेशी मूल की होने के कारण वर्ष कहकर उनको प्रधानमंत्री बनने पर विरोध किया। लेकिन सोनिया गांधी ने त्तकालीन राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम के सामने सरकार बनाने के प्रस्ताव पास किए पेश किया। लेकिन सोने गांधी ने इस बात को करते हुए खुद कहा कि वह अंतरात्मा की आवाज पर प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहती।

2006 में सोनिया गांधी को राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की अध्यक्ष बना दिया। 2006 में लाभ पद पर रहने के मामले के कारण सोनिया गांधी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। और फिर से चुनाव जीतकर वापस आए।

2009 में फिर से सोने गांधी की अध्यक्षता में लोकसभा का चुनाव लड़ा गया। और एक बार फिर कांग्रेस गठबंधन को विजय मिली। जिसमें मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) देश के प्रधानमंत्री फिर से बन गए।

2014 में एक बार फिर सोनिया गांधी की अध्यक्षता में लोकसभा चुनाव को लड़ा गया था। लेकिन इस बार चुनाव में उन को हार का मुंह देखना पड़ा।

2018 में सोनिया गांधी ने अपने पुत्र राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को पार्टी की अध्यक्षता दे दी। सोनिया गांधी के नाम पार्टी की अध्यक्ष सबसे ज्यादा रहने का रिकॉर्ड दर्ज है।

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