PM MODI: पाँच अगस्त को अयोध्या में श्रीराम मंदिर के लिए भूमि पूजन

PM Modi Office: राम लला की जन्मभूमि अयोध्या तीर्थ स्थाल की बैठक के बाद अब प्रधानमंत्री कार्यालय ने रामनगरी मे श्रीराम मंदिर के निर्माण के लिए भूमि पूजन के कार्यकर्म के लिए मुहर लगा दी है. राम मंदिर की भूमि पूजन के लिए पाँच अगस्त की तारिक तय की है. मोदी देश के प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार अयोध्या जाएंगे. पीएम मोदी वहाँ 40 किलो चाँदी से बनी श्रीराम की शीला का पूजन करेंगे और इसको स्थापित भी करेंगे. इस मूर्ति को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने समर्पित की है.

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट ने पीएम मोदी को इस कार्यकर्म के लिए आमंत्रित किया था. पीएम कार्यालया की ओर से श्रीराम जन्मभूमि के भूमि पूजन के लिए ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ को पाँच अगस्त के लिए मंजूरी दे दी है. इस दिन का इंतजार श्रीराम के भगत बड़े लंबे समय से कर रहे थे. पीएम मोदी का अयोध्या में चार घंटे का कार्यकर्म होगा. श्रीराम के भव्य मंदिर के लिए भूमि पूजन के कार्यकर्म के आलंवा वहाँ के पर्यटन पर भी कार्यकर्म देखेंगे. यह तिथि अहम बताई जा रही है क्योंकि पिछले वर्ष इसी दिन को 370 धारा हटाई गयी थी.

Lucknow: सीएम योगी और चंपत रॉय के बीच वार्तालाप  

रविवार को पीएम ऑफिस से श्रीराम जन्मभूमि पूजन की तरीख तय होने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत रॉय सीएम योगी के आमंत्रण पर लखनऊ पहुंचे. वें श्रीराम जन्मभूमि पूजन और विकास योजनाओं पर मंथन करेंगे. इस बीच दोनों पीएम मोदी के कार्यकर्म की भी चर्चा करेंगे. पीएम पाँच अगस्त को 11 बजे से 3.10 तक अयोध्या में रहेंगे.

Ayodhya: ऐसा होगा श्रीराम जन्मभूमि का पूजन

वैदिक रीति के अनुसार प्रधानमंत्री ताम्र कलश को राम मंदिर की नींव पूजन में स्थापित करेंगे. विधि के अनुसार सभी तीर्थों के जल, पंच रत्न जिनमें हीरा, पन्ना, माणिक, सोना और पीतल रखें जाएंगे. इसके साथ सभी पाताल लोक के राजा शेषनाग और शेषावतार की प्रशंसा के लिए चाँदी के नाग-नागिन, भूमि के आधार देव भगवान विष्णु के कच्छप अवतार के प्रतीक कछुआ भी नींव में स्थापित होंगे. मंगल कलश में सेवर घास रखकर सभी तीर्थों सहित गंगा जल से कलश को भरा जाएगा. इसके बाद वैदिक वास्तु पूजन और विधान के अनुसार कलश स्थापित करने के बाद नन्दा, भद्रा, जया, रिक्ता और पूर्णा नाम की पाँच ईंटों/ शिलाओं की पुजा की जाएगी. वैदिक पूजन के बाद ही सारी सामग्री नींव में स्थापित कर मंदिर का औपचारिक निर्माण शुरू किया जाएगा. इस तरह से श्रीराम मंदिर के निर्माण का श्री गणेश होगा.

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