लालजी टंडन: मध्य प्रदेश के गवर्नर अब नहीं रहे, पिछले 40 दिन से लखनऊ के अस्पताल में भर्ती थे…

लालजी टंडन: मंगलवार आज सुबह 5:30 बजे मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन (85) का निधन हो गया। 11 जून से उनको सांस लेने में बहुत तकलीफ हो रही थी और बुखार के चलते लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पिछले 40 दिनों से लखनऊ के अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था और आज सुबह यह खबर मिलती है कि उनका देहांत हो गया है। डॉक्टरों ने कल सोमवार को यह बताया था कि उनकी हालत बहुत ही क्रिटिकल है। आज शाम 4:30 बजे लखनऊ में उनका अंतिम संस्कार होगा प्रधानमंत्री ने उनके निधन पर शोक जताया है और उत्तर प्रदेश सरकार ने 3 दिन का राजकीय शोक की घोषणा की है। 

उनके बेटे आशुतोष टंडन ने अपने पिता की निधन की जानकारी अपने टि्वटर हैंडल दी। आपको बता दें कि टंडन का कोरोना टेस्ट नेगेटिव आया था। पिछले कुछ दिनों से उनको लीवर में दिक्कत होने के कारण 14 जून को उनका एमरजैंसी ऑपरेशन कराया गया था उनकी यह हालत को देखकर केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को आधिकारिक तौर से मध्य प्रदेश का राज्यपाल बनाया हुआ था। मोदी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से लालजी टंडन के निधन की जानकारी देते हुए कहा कि लालजी टंडन समाज में अपने कामों के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। उत्तर प्रदेश में भाजपा को एक मजबूत स्थिति में पहुंचाने में उनका बहुत बड़ा योगदान रहेगा। उनको कानूनों को बारीकी से समझने की उपज थी। वह एक कुशल प्रशासक थे। लालजी टंडन अटल बिहारी वाजपेई के साथ बहुत लंबे समय से जुड़े रहे। इस दुख की घड़ी में, मैं अपनी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ व्यक्त करता हूं और भगवान से यह विनती करता हूं कि इस दुख की घड़ी में भगवान उनके परिवार को मजबूती दे।

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 12 साल की उम्र में ही अपने आपको संग से जोड़ दिया था

लालजी टंडन ने अपने आप को 12 साल की उम्र में ही संघ से जोड़ दिया था और संघ के जुड़ाव के चलते ही वह अटल बिहारी वाजपेई से मिले थे। जब अटल जी ने लखनऊ की सीट छोड़ दी थी तब बतौर विरासत लालजी टंडन को उनकी सीट दी गई थी। 2009 में  लोकसभा चुनाव को भी जीता था और वह लखनऊ से सांसद बन कर आए थे। आपको बता दें कि लालजी टंडन दो बार पार्षद और दो पर विधान परिषद के सदस्य रहे हैं और 1966 में लालजी टंडन ने अपना राजनीतिक सफर को आगे बढ़ाया था। लगातार तीन बार विधायक भी रह चुके हैं। कल्याण सिंह सरकार में मंत्री भी रहे थे।

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