मशहूर उर्दू शायर Rahat Indori का दिल का दौरा पड़ने से निधन, कभी कहा था- ”बुलाती है मगर जाने का नहीं”

Rahat Indori: 11 अगस्त मंगलवार शाम 5:00 बजे के करीब डॉ राहत इंदौरी कोरोनावायरस के चलते दिल का दौरा पड़ने से 70 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। मशहूर उर्दू शायर राहत इंदोरी में बीते रविवार को कोरोना वाइरस के कुछ लक्षण पाए गए थे। जिस के चलते उनका सोमवार को कोरोना टेस्ट कराया गया था और टेस्ट रिपोर्ट पॉज़िटिव आई थी। उनका इलाज इंदौर के अरविंदो अस्पताल में चल रहा था। इंदौर के अस्पताल में एक अधिकारी ने इंदौरी की निधन की सूचना दी। अस्पताल के चेयरमैन डॉक्टर विनोद भंडारी ने कहां इंदौरी को दिन में दिल के दो दौरे आए थे और वह निमोनिया से ग्रस्त भी थे। प्रसिद्ध कवि इससे पहले सुबह अपने प्रशंसकों के साथ कोरोनावायरस पॉज़िटिव रिपोर्ट के बारे ट्वीट कर जानकारी दी थी। उसमें उन्होंने अपने फैंस से उनके जल्द शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करने को कहा था। लेकिन आज शाम को पता चलता है कि मशहूर शायर डॉक्टर राहत इंदौरी अब हमारे बीच नहीं रहे। यह जानकारी उनके फैंस और देश के लिए बहुत दुखदाई है।

मशहूर उर्दू शायर राहत इंदोरी का दिल का दौरा पड़ने से निधन, कभी कहा था- ''बुलाती है मगर जाने का नहीं''

उर्दू शायरी गजलों की शैली में एक प्रसिद्ध व्यक्ति राहत इंदौरी थे। जिन्होंने बॉलीवुड गीतों में अपने अपने गीत भी लिखे थे। उर्दू कलाकार ने मुन्ना भाई एमबीबीएस, मर्डर और अन्य जैसी फिल्मों के लिए कई बॉलीवुड गीतों को लिखा है। अपनी शायरी से सब को अपनी और आकर्षित करते वाले राहत इंदौरी के कुछ शायरी…

2 गज सही यह मेरी मिल्कियत तो है

कभी तेरा नसीब चमकदार कर दिया, इस बार के थपेड़ों ने उस पार कर दिया

2 गज सही यह मेरी मिल्कियत तो है, ऐ मौत तूने मुझे जमीदार कर दिया।

एक चिंगारी नज़र आई थी

नींद से मेरा ताल्लुक़ ही नहीं बरसों से, ख़्वाब आ आ के मेरी छत पे टहलते क्यूं हैं

एक चिंगारी नज़र आई थी बस्ती में उसे,वो अलग हट गया आँधी को इशारा कर के

इन रातों से अपना रिश्ता जाने कैसा रिश्ता है, नींदें कमरों में जागी हैं ख़्वाब छतों पर बिखरे हैं

बुलाती है मगर जाने का नहीं

बुलाती है मगर जाने का नहीं, ये दुनिया है इधर जाने का नहीं

मेरे बेटे किसी से इश्क़ कर, मगर हद से गुज़र जाने का नहीं

ज़मीं भी सर पे रखनी हो तो रखो, चले हो तो ठहर जाने का नहीं

सितारे नोच कर ले जाऊंगा, मैं खाली हाथ घर जाने का नहीं

मैं बच भी जाता तो…

किसने दस्तक दी, दिल पे, ये कौन है, आप तो अन्दर हैं, बाहर कौन है

ये हादसा तो किसी दिन गुजरने वाला था, मैं बच भी जाता तो एक रोज मरने वाला था

मेरा नसीब, मेरे हाथ कट गए वरना, मैं तेरी माँग में सिन्दूर भरने वाला था

कई बीमारियों से ग्रस्त थे

आपको बता दें कि आज शाम को उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उनका निधन हो गया। उनके दोनों फेफड़े में कोरोना का संक्रमण और किडनी में सूजन थी। उनके शरीर में 60 फ़ीसदी तक निमोनिया था। कोरोना टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आने के साथ ही उनको इंदौर के अरविंदो अस्पताल में भर्ती कर लिया गया था। अरविंदो अस्पताल के डायरेक्टर विनोद भंडारी ने जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें कई प्रकार की दिक्कत थी जिन का पता इलाज के दौरान लगा। जिनमें पायलेटर निमोनिया, 70% लंग्स खराब, कोविड-19, हाइपरटेंशन, डायबिटीज शामिल थे।

राजनाथ सिंह, राहुल गांधी कई लोगों के ट्वीट कर जताया दुख

डॉ राहत इंदौरी अपनी शायरी से मशहूर तो थे ही बल्कि अपने अंदाज के लिए भी जाने जाते थे।उनकी शायरी में अलग ही प्रकार का असर देखने को मिलता था। जो दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करता था। सही में, इंदौरी साहब ज्ञान के भंडार थे। वह अपनी शायरी में अधिक गहराई तक चले जाते थे। आज हम उनकी सभी बातों को याद करके भगवान से दुआ करते हैं, भगवान उनकी आत्मा को शांति दे। उनको उनकी शायरी और अदाकारी के लिए जन्मो-जन्मो तक याद किया जाएगा। हम सब लोगों को इस बात का दुख रहेगा की आज हमारे बीच में से एक मशहूर शायर चला गया। हम सब उनको याद करेंगे।

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